साहित्य

तेरी याद

अतुल पाठक

तेरी यादों का मौसम जब दिल में उतर आता है,
सूना सा हर पल भी महकने लगता है।
तेरे नाम की हल्की सी आहट भर से,
दिल का हर कोना धड़कने लगता है।
जब भी तेरी मुस्कान याद आती है,
चाँदनी भी कुछ ज्यादा उजली लगती है।


तेरी आवाज़ की वो मीठी सरगम,
रातों में कोई धुन सी जगती है।
तेरी नज़रों की वो मासूम सी बात,
दिल को चुपके से छू जाती है।
तेरे होने का अहसास ही काफी है,
हर तन्हाई मुस्कुरा जाती है।
काश तू पास बैठा हो मेरे कभी,
और ये पल यहीं ठहर जाए।
तेरी बाहों की उस नर्म सी दुनिया में,
मेरा सारा जहाँ सिमट जाए।

अतुल पाठक
हाथरस(उत्तर प्रदेश)

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