
युवा किसी भी राष्ट्र की शक्ति, आशा और भविष्य होते हैं। उनके सपनों में देश का कल बसता है। परंतु वर्तमान समय में एक चिंता उभरकर सामने आ रही है- युवा पीढ़ी का लक्ष्यहीन होना। संसाधनों की प्रचुरता और अवसरों की बहुलता के बावजूद अनेक युवा दिशा भ्रम का शिकार हैं। यह स्थिति केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक चिंता का विषय बन चुकी है।इस पर चिंतन आवश्यक है।
आज का युवा तकनीकी युग में जन्मा है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और त्वरित सफलता की कहानियाँ उसके सामने हैं। वह दूसरों की उपलब्धियों को तो देखता है, परंतु उनके पीछे छिपे संघर्ष को नहीं। परिणामस्वरूप वह शीघ्र सफलता पाना चाहता है। जब अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते, तो निराशा उसे घेर लेती है। लक्ष्य स्पष्ट न होने के कारण उसकी ऊर्जा बिखर जाती है।
एक प्रमुख कारण पारिवारिक और सामाजिक अपेक्षाएँ भी हैं। कई बार युवाओं पर ऐसे करियर चुनने का दबाव डाला जाता है जो उनकी रुचि के अनुरूप नहीं होते। वे अपनी इच्छा और समाज की अपेक्षाओं के बीच झूलते रहते हैं। इस द्वंद्व में उनका आत्मविश्वास कमजोर पड़ जाता है। इसके अतिरिक्त, शिक्षा व्यवस्था में भी व्यावहारिक मार्गदर्शन और जीवन कौशल की कमी देखी जाती है। केवल परीक्षा और अंक आधारित प्रतिस्पर्धा युवाओं को वास्तविक जीवन के लक्ष्यों से दूर कर देती है।
संगति का प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। यदि मित्र मंडली में सकारात्मक सोच और प्रेरणा का अभाव हो, तो युवा भटक सकते हैं। नशे की प्रवृत्ति, समय का दुरुपयोग और आभासी दुनिया में अधिक समय बिताना भी लक्ष्यहीनता को बढ़ावा देता है।
इस समस्या का समाधान बहुआयामी है। सबसे पहले, युवाओं को आत्मचिंतन की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्हें अपने भीतर झांककर यह समझना होगा कि उनकी वास्तविक रुचि और क्षमता क्या है। छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करना उन्हें आत्मविश्वास प्रदान करेगा। परिवार को भी चाहिए कि वे बच्चों की प्रतिभा को पहचानें और उन्हें स्वतंत्र निर्णय लेने का अवसर दें।
विद्यालयों और महाविद्यालयों में कैरियर परामर्श, व्यक्तित्व विकास और नैतिक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रेरणादायक साहित्य, सकारात्मक संगति और कुशल मार्गदर्शकों का साथ युवाओं को दिशा दे सकता है। असफलताओं को अंत नहीं, बल्कि सीख मानने की मानसिकता विकसित करनी होगी।
युवा पीढ़ी यदि अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाए, तो वह असंभव को भी संभव बना सकती है। लक्ष्य जीवन को अर्थ देता है, और अर्थपूर्ण जीवन ही समाज को सशक्त बनाता है। आवश्यकता है जागरूकता, धैर्य और निरंतर प्रयास की। जब युवा अपने उद्देश्य को पहचान लेंगे, तब राष्ट्र का भविष्य स्वतः उज्ज्वल हो जाएगा।
“युवाओं को बस एक दिशा चाहिए,
क्योंकि जब संकल्प जागता है,
तो भविष्य स्वयं रास्ता बना लेता है।”
प्रतिमा पाठक
दिल्ली



