
“ठेठ भारतीय अद्वितीय सपूत-युगल”
पच्चीस दिसम्बर वो तिथि है,जिस तिथि को हमारे देश के दो विलक्षण अमर पुत्रों ने जन्म लिया था उन दोनों की जयंती समग्र देश हर्षोल्लास के साथ मना रहा है।
दोनों ही सुविचारित, अदम्य साहसी, बेलाग-डांट स्पष्ट वक्तृत्व कला के धनी,निर्भीक और किसी भी प्रकार के झांसे में
न आने वाले अपने अपने क्षेत्र के मंजे खिलाड़ी तथा मां सरस्वती के अमर पुत्र हैं।
आप दोनों उस भानु सदृश्य हैं जो अपने स्वर्णिम आलोक से धरती के अंधकार को हर लेता है। “आप दोनों उस भ्रमर के समान हैं जो जीवन रूपी मकरंद तो देता है किंतु डंक कभी नहीं मारता”।
मैं इस लेख के माध्यम से समग्र देशवासियों की ओर से परमादरणीय दोनों ही व्यक्तित्व को स्मरण, नमन व वंदन करते हुए असंख्य श्रद्धासुमन समर्पित करती हूँ। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹
* श्रद्धेय पंडित मदनमोहन मालवीय *
एक संक्षिप्त परिचय –:
जन्म -: 25 दिसम्बर सन् 1861 प्रयाग, परतंत्र भारत।
मृत्यु -: 12 नवम्बर 1946 (आयु: 85 वर्ष)बनारस, परतंत्र भारत।
राष्ट्रीयता -: भारतीय। राजनैतिक पार्टी -: हिन्दू। महासभा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस।
विद्या अर्जन -: प्रयाग। विश्वविद्यालय -: कलकत्ता विश्वविद्यालय।
धर्म -: हिन्दू।
कर्म ही उनका जीवन था। अनेक संस्थाओं के जनक एवं सफल संचालक के रूप में उनकी अपनी विधि व्यवस्था का सुचारु सम्पादन करते हुए उन्होंने कभी भी रोष अथवा कड़ी भाषा का प्रयोग नहीं किया। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना इन्हीं महानुभाव के कर कमलों से सम्पन्न हुई। भारत सरकार ने २४ दिसम्बर २०१४ को उन्हें भारत रत्न से अलंकृत किया।
* श्रद्धेय बिहारी वाजपेयी *
एक संक्षिप्त परिचय –:
(25 दिसंबर 1924 – 16 अगस्त 2018)
भारत के तीन बार के प्रधानमंत्री थे। वे पहले 16 मई से 1 जून 1996 तक, तथा फिर 1998 मे और फिर19 मार्च 1999 से 22 मई 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।
वे हिंदी कवि, पत्रकार व एक प्रखर वक्ता थे। वे भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में एक थे, और 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया।
जन्म -: 25 दिसम्बर, सन् 1924, ग्वालियर, मध्य प्रदेश।
मृत्यु -: अगस्त 16, 2018 (उम्र 93) एम्स दिल्ली (सायं 5 बजे) नई दिल्ली।
राष्ट्रीयता -: भारतीय
राजनैतिक दल -: भारतीय जनता पार्टी।
धर्म -: हिन्दू धर्म।
वह चार दशकों से भारतीय संसद के सदस्य थे, लोकसभा, निचले सदन, दस बार, और दो बार राज्य सभा, ऊपरी सदन में चुने गए थे। उन्होंने लखनऊ के लिए संसद सदस्य के रूप में कार्य किया, 2009 तक उत्तर प्रदेश जब स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण सक्रिय राजनीति से सेवानिवृत्त हुए। अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारंभ करने वाले वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहले प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमंत्री पद के 5 वर्ष बिना किसी समस्या के पूरे किए। आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेने के कारण इन्हें ‘भीष्मपितामह’ भी कहा जाता है। इन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मंत्री थे।
इन्होंने सन् 2005 से राजनीति से संन्यास ले चुके थे और नई दिल्ली में 6-ए कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते थे। 16 अगस्त 2018 को एक लंबी बीमारी के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली में श्री वाजपेयी का निधन हो गया। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे।
इतनी अद्वितीय क्षमताओं, गुणों की खान होने के बावज़ूद भी निरभिमानी, शांत, सरल होना बहुत बड़ी बात है।उनका साहित्य-सृजन, सादा जीवन-उच्च विचार तथा और भी बहुत कुछ हम सब के लिए अनुकरणीय हैं।
अंत में अंतः में कुलबुलाती दो पंक्तियाँ ऐसे व्यक्तित्व के धनी को ससम्मान समर्पित हैं।
” पुनि पुनि आओ हमारे देश,
धरा तुम्हारी राह- जोहती। कहाँ चले गए हो मेरे लाल!
भारत माता तुम्हें पुकारती।”
लेखिका-
सुषमा श्रीवास्तव
मौलिक रचना
सद्यः लिखित



