
भारतीय संस्कृति की मूल चेतना सेवा, संवेदना और सृजन में निहित है। जब कोई व्यक्तित्व इन तीनों आयामों को अपने जीवन में समान रूप से आत्मसात कर लेता है, तब वह केवल एक कलाकार या साहित्यकार नहीं रहता, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाता है। करुणा सिंह “कल्पना” ऐसा ही एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने साहित्य, संगीत, अभिनय, समाजसेवा और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाया है। उनका संपूर्ण जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि प्रतिभा तभी सार्थक होती है जब उसका उपयोग समाज और मानवता के कल्याण के लिए किया जाए।
बिहार के भागलपुर जनपद के रंगरा की पावन धरती पर जन्मी करुणा सिंह “कल्पना” वर्तमान में झारखंड की राजधानी रांची में निवास करती हैं। उनके पति श्री अजित कुमार सिंह कोल इंडिया में महाप्रबंधक (वित्त) के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। पारिवारिक संस्कारों और आध्यात्मिक वातावरण ने उनके व्यक्तित्व को प्रारंभ से ही संवेदनशील, अनुशासित और रचनाशील बनाया। यही कारण है कि उन्होंने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की।
करुणा सिंह “कल्पना” बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। तबला, हारमोनियम, गायन, नृत्य, कविता, कहानी, भजन और पूर्णिका लेखन जैसे विविध क्षेत्रों में उनकी समान दक्षता उन्हें विशिष्ट बनाती है। उनकी रचनाओं में केवल शब्दों की सजावट नहीं, बल्कि जीवन के यथार्थ, प्रकृति के प्रति अनुराग, मानवीय संवेदनाओं की गहराई और राष्ट्रप्रेम की उज्ज्वल चेतना सहज रूप से दिखाई देती है। उनकी लेखनी पाठकों के मन को स्पर्श करने के साथ-साथ सकारात्मक सोच का संदेश भी देती है।
साहित्य साधना के साथ-साथ उनका सेवा-कार्य अत्यंत उल्लेखनीय है। कोरोना महामारी के कठिन काल में जब पूरा देश अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा था, तब उन्होंने अपनी संस्था के माध्यम से गाँवों, बस्तियों और शहरी क्षेत्रों में यथाशक्ति सेवा का कार्य किया। जरूरतमंदों तक सहायता पहुँचाने, मानवता की रक्षा करने और सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने का उनका संकल्प समाज के लिए प्रेरणास्पद है। इसी सेवा-भाव के कारण उन्हें राज्य सरकार सहित अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया।

करुणा सिंह “कल्पना” ने अभिनय के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। बॉलीवुड फिल्मों, वेब सीरीज, लघु फिल्मों, सरकारी विज्ञापनों तथा विभिन्न सामाजिक संदेशों से जुड़े रचनात्मक कार्यों में उनकी सक्रिय सहभागिता रही है। उनकी आगामी फिल्में और भजन एल्बम उनकी बहुआयामी प्रतिभा का विस्तार हैं। विशेष रूप से पद्मश्री भजन सम्राट अनूप जलोटा जी के साथ भजन एल्बम में सहभागिता उनके संगीत-साधना के उच्च स्तर को रेखांकित करती है।
उनकी प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है। हिंदी दिवस, राष्ट्रीय सरस खादी महोत्सव, दैनिक जागरण, लायन क्लब, विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं तथा अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों द्वारा प्राप्त सम्मान उनके सतत सृजन और समाजसेवा की सार्वजनिक स्वीकृति हैं। नेपाल, दिल्ली, जयपुर, जबलपुर, पटना सहित देश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर उन्हें सम्मानित किया जाना उनके व्यापक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान का प्रमाण है।
साहित्य के क्षेत्र में उनकी तीन एकल कृतियाँ—”मन मृदंग”, “साँस-साँस में” तथा “प्रेम की पूर्णिका”—विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन कृतियों में प्रेम, प्रकृति, अध्यात्म, मानवीय संबंध और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। उनकी रचनाएँ देश की अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रहती हैं, जिससे उनकी साहित्यिक सक्रियता और सृजनशीलता का परिचय मिलता है।
मॉडलिंग के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। गृहलक्ष्मी और वनिता जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के आवरण पृष्ठ पर उनकी उपस्थिति यह सिद्ध करती है कि आत्मविश्वास, गरिमा और व्यक्तित्व का प्रभाव किसी भी क्षेत्र में सफलता का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। उन्हें प्राप्त “मिसेज रांची” सम्मान भी उनकी बहुआयामी प्रतिभा का एक और सशक्त प्रमाण है।
करुणा सिंह “कल्पना” का जीवन केवल उपलब्धियों की सूची नहीं, बल्कि एक सतत साधना है। योग, ध्यान, प्राणायाम, प्रकृति संरक्षण तथा समस्त जीव-जंतुओं के प्रति करुणा का भाव उनके जीवन-दर्शन का अभिन्न अंग है। उनका विश्वास है कि ईश्वर की सच्ची उपासना मानव सेवा, प्रकृति संरक्षण और संवेदनशील जीवनशैली में निहित है। यही कारण है कि उनकी रचनाओं में आध्यात्मिकता और सामाजिक चेतना का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
आज जब समाज भौतिक उपलब्धियों की दौड़ में मानवीय मूल्यों से दूर होता जा रहा है, ऐसे समय में करुणा सिंह “कल्पना” जैसी सृजनशील विभूतियाँ यह संदेश देती हैं कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति है। उनकी लेखनी, सेवा-भाव, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि करुणा सिंह “कल्पना” अपनी सृजनशीलता, मानवीय संवेदनाओं और समाजोपयोगी कार्यों के माध्यम से भविष्य में भी साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करती रहेंगी। उनकी साधना, सेवा और सृजन भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की गौरवशाली विरासत को निरंतर समृद्ध करते रहें—यही मंगलकामना है।
(लेखक दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह के समूह सम्पादक हैं)



