साहित्य

सब कुछ दफ़न होना है 

डॉ रामशंकर चंचल 

सब कुछ दफ़न होना है

याद तो यही किरदार रहेगा

 

पता नहीं दुनियां किस सुकून की चाह में रोज़ रोज़ दौड़ भाग रही है

जबकि जब से होश संभला है मैने देखा है आज भी सदियों बाद कुछ जिंदा दिखाई देता है तो केवल वह जो लिखा गया है अमर हो गया है

रग रग में पांच सो दल भी आज जिंदा हैं और करोड़ों की जुबान पर है

मान,सम्मान,धन दौलत, यश ,कीर्ति

सैकडो चाह में बेहिसाब दौड़ भाग रही है दुनियां जबकि यह एक अल्प विराम सा सुख है चाह है और जब जीवन का अंत समय आता है करीब तो अक्सर ऐसे लोगों को कहते सुना गया है व्यर्थ जीवन गया

कुछ ऐसा किया होता जो जिंदा रहता,यह सब उनकी अंत समय की पीड़ा सावर्जिनक होती हैं जिसे आज की पीढ़ी पड़ती हैं और भूल जाती हैं

खैर साहब जितना लिखा जाय कम होगा, आज में जीता आज को कोई समझा नहीं सका संभव भी नहीं

कलयुग है जो होना है तय है व्यर्थ जीवन समय क्यों खराब करें, जीनो दो किसी का कोई दोष नहीं फिर बड़ा सत्य यह है कि कुछ कर गुजरने के लिए देश और दुनिया समाज को देने के लिए अपना बहुत कुछ आनंद मस्ती सुख सुकून त्यागना होता है साहब और यह साहस, यह अद्भुत त्याग हर किसी के लिए संभव नहीं है ,

बस मन हल्का किया लिख कर दुनियां के बैराग आलाप को देख देख परेशान हो जाता हूं लिख हल्का हो जाता हूं जानता हूं मेरा लिखा भी व्यर्थ है

राम जाने साहब राम की दुनियां है में नाचीज़ फकीर का क्या अस्तित्व

महत्व वंदन सभी को सत् सत् वंदन मानव मात्र पशु पक्षी सभी को ईश्वर सब को सब दे जो चाह रहा है

 

डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ मध्य प्रदेश

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