साहित्य

मेहनत कर खामोशी से 

कुलदीप सिंह

#मेहनत कर खामोशी से न कोई शोर मचाना है

अपने कर्मों की ज्वाला से जग में दीप जलाना है।

 

राह कठिन हो लाख मगर कदम नहीं रुकने देना

आंधी आए या तूफ़ां हो हौसला नहीं झुकने देना।

 

पसीने की हर एक बूंद कल मोती बन जाएगी

तेरी तपस्या की गाथा दुनिया खुद ही गाएगी।

 

जब तक मंज़िल दूर दिखे तब तक रण जारी रखना

अपने भीतर के योद्धा को हर पल जागृत रखना।

 

आज भले पहचान न दे तुझको ये संसार कोई

कल तेरे जयघोष से गूंजेगी हर राह नई।

 

इतना ऊँचा उड़ना कि फिर नभ भी छोटा लग जाए

तेरे दृढ़ संकल्पों से पर्वत भी सिर झुकाए।

 

खामोशी से बढ़ता चल मत व्यर्थ समय गंवाना रे

जब परिणाम सामने होगा जग दांतों तले उंगली दबाना रे।

 

 

कुलदीप सिंह रुहेला

सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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