साहित्य

कविताएँ

अभिलाषा श्रीवास्तव

मन के खाली पन्नों पर लिखा किसी ने कविताएँ

शब्दों के उस पथ- पथिक पर ठहरा हुआँ संकुचित बगियाँ

अपनें- अपनें हिस्से का किस्सा लिखा किसी ने प्रेम- व्यथा

मंदाकिनी की धार

गंगा की पवित्रता लिखा

उन खाली पन्नों में, किसी ने कभी क्यों नही लिखा

कामदगिरि का किस्सा

कविताओं के खाली पन्नों पर अधूरा- टूटा बिखरा पड़ा लिखा मैनें

एक ही शब्द

कविताओं का सब्र ना देखना

अतंस को जला लेतीं है भावार्थ के अग्नि में बैठाकर भ्रमित खुद को रखतीं है

नीलकंठ से उपजी स्याही

मन का स्याह मिटाती है

तभी तो कविताएँ आखिर सांस तक कवि की प्रियसी कहलातीं है।

अभिलाषा श्रीवास्तव गोरखपुर

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