
भूल गई क्या तुम
वो वादे, वो बातें, वो रातें
जो कहा था कभी
“तुम बिन अधूरा हूं मैं”
आज सब बदल गया
या बस मैं ही याद रखे बैठी हूँ
शायद तुम आगे बढ़ गए
में ही खुदको सजाये बैठी हूँ
चलो अच्छा है मैं चाहती यही थी
तुम मुझे भूल जाओ
शायद अच्छा होगा
तुम्हारे ओर मेरे लिए
की मैं तुम्हारी जिंदगी से चली जाऊं
भूल गई हु तुमको अब
तुम फिरसे करीब आओ ना
भुला दी हैं तुम्हारी यादें
तुम फिर से याद दिलाओ ना ।।
– रिया राणावत
कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)




