
प्रात: काल की बेला में, करो शिव को प्रथम नमन।
“ॐ नम:शिवाय ” कह करो वंदन, महादेव की कृपा मिले।
शुभ सोमवार है भोले का, चढ़ाओ, भोले पर बेल और जल।
पूज रहे हम उस महाकाल को, जो है वैरागी।
सम्मान-अपमान का भय नहीं, है ना मित्र ना कोई पराया।
करते सृष्टि का संतुलन,भस्म लगी है तन पर।
चंद्र है जिनके सिर पर, गले में सर्प की माला, तीसरा नेत्र भी है।
बम-बम-बम-बमभोलेभोले, रास्ते पर है कावंडिया बोलते।
कंकर-कंकर में शिवशंकर, हे नीलकंठ, गुणगाये सदा आपके।
अनन्त नाम है आपके शिव, रहे सांस-सांस पर आपका नाम।
जपो ॐ त्रिम्बकेश्वर, आशुतोष, काशीनाथ।
कैलाशपति, ॐ महादेव की कृपा बनी रहे।
विषपान करने वाले, जटा में गंगा को संभालने वाले, कृपा करो।
सबके कष्ट हरो महाकाल, महादेव
“ॐ नम: शिवाय ”
डॉ. प्रभा जैन “श्री ”
देहरादून




