
से सम्मानित करने के लिए मैं’ श्री राम साहित्य सेवा संस्थान’ (अयोध्या, उत्तर प्रदेश),और संस्थापिका श्री दिव्यांजलि वर्मा जी के प्रति हार्दिक कृतज्ञता ज्ञापित करती हूं।
भक्ति की शक्ति
वह शक्ति हमें दो दयानिधे,
कर्तव्य मार्ग पर ड़ट जावें।
पर सेवा पर उपकार में हम,
जग जीवन सफ़ल बना जावें।
हम दीन दुःखी निर्बलों विकलों के
सेवक बन संताप हरें।
जो हैं अटके भूले भटके,
उनको तारें ख़ुद तर जावें।
छल दम्भ द्वेष पाखण्ड
झूठ-अन्याय से निशि दिन दूर रहें।
जीवन हो शुद्ध सरल अपना,
सुचि प्रेम सुधारस बरसावें।
निज आन मान मर्यादा का,
प्रभु ध्यान रहे अभिमान रहें।
जिस देश, जाति में जन्म लिया,
बलिदान उसी पर हो जावें।
-डॉ. दक्षा जोश
‘ निर्झरा
अहमदाबाद, गुजरात।



