
सुना था बहुत कि टूटते तारे से कुछ भी मांगो देता है बस एक दिन अपने मित्र के साथ दूर किसी जंगल में दस्तक दे खाना खा बहार खटिया पर बैठा था और खुले आसमान को देख रहा था अच्छा लग रहा था तारों से सजा हुआ चमकता हुआ मोहक छवि लिए बस हम भी किसी की याद में खो गए पूरे मन आत्मा से तभी आसमान से तारा टूटा हम तुरंत उस को मांग बैठे जो संभव नहीं था बस वैसे ही देखा क्या होता हैं पर दूसरे ही दिन हमारे जीवन में दस्तक दे मिल गया तब कुछ देर तो अच्छा लगता रहा पर वह गलत था जो कभी किया नहीं न चाहता था पर फिर मंगा क्यों उसने दे दिया
उस एक गलती की सजा यह थीं कि हमने जीवन में ईश्वर से भी कभी कुछ नहीं चाहा सदा ही मानव मात्र पशु पक्षी सभी प्रणियों की रक्षा करें वह दिन आज तक नहीं भुला सका और जीवन बदल गया एक सार्थक कर्म करते हुए सदा ही मानव मात्र से प्यार करते हुए निर्विकार मन आत्मा से सृजन शील
बस यही जीवनमान जी रहा हूं सालो से नसीब यह ईश्वर आशीष
जो कभी कभी मन में दस्तक देता है क्या यही जीवन है तो फिर सब तो मुझे से अलग क्यों दिखते है
खैर ज्यादा सोचना यह भी बंद कर देना और मस्त हो सदा ही ईश्वरीय शक्ति को प्रणाम करते हुए जीवन व्यतीत कर रहा हूं
आगे क्या होता हैं कल क्या होगा सब कुछ राम जाने उसका दिया है यह जीवन वो जाने
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश




