साहित्य

वर्षा-गीत

सुषमा श्रीवास्तव,

गरज-गरज कर बरसो वारिद,

धरती प्यास बुझा जाओ।

रोम रोम में अगन लगी है,

अंतस तक शीतल कर जाओ।

बाट जोहती धरा तुम्हारी,

रिमझिम मेघ बरसा जाओ।

सूखे पड़े ताल-तलैया,

जलधि में उफ़ान लाओ।

अपनी रसभीनी फुहार से,

तन-मन मस्तिष्क भिगो जाओ।

आ जाओ,आ जाओ हे मेघराज तुम आ जाओ,

आकर आसमान में तुम अपनी कृपा बरसा जाओ।।

 

सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक सृजन, सद्यः निःसृत, ©®, रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।

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