
झाबुआ नि प्र ख्यात साहित्य साधक डॉ रामशंकर चंचल को उनकी अद्भुत बेहद चर्चित रूह प्रेम कथाओं की कालजयी कृति,वो गली वो मकान को, को इंकलाब पब्लिकेशन बंबई द्वारा एक चयन समिति ने, अमृता प्रतीम सम्मान से सम्मानित किया, इस ईश्वरीय आशीष को अद्भुत उपलब्धि को रूह आशीष को सत् सत् प्रणाम करते हुए डॉ रामशंकर चंचल ने कहां कि , मेरा सोभाग्य है , ईश्वरीय रूह शक्ति का आशीष है कि आज देश और दुनिया में साहित्य जगत में ख्यातीप्राप्त रूह प्रेम मलिका अमृता प्रतीम जैसे महत्वपूर्ण सम्मान से सम्मानित किया गया है
यह मेरे रूह प्रेम की पावनता और पवित्रता का सार्थक सुख सुकून है
वंदनीय है मेरे जीवन में सदा ही वो गली वो मकान जिसने मेरा जीवन सार्थक करते हुए झाबुआ जैसे पिछड़े आदिवासी अंचल को विश्व धरा पर चर्चा बना दी सचमुच वंदनीय है वह ईश्वरीय रूह आशीष आज देश और दुनिया में साहित्य जगत में दस्तक देती अमेज़न पर उपलब्ध कृतियों का मेरी सभी 15, कृतियों का श्रेय इस ईश्वरीय रूह आशीष को है या सत् केवल में जानता हूं
वंदन सभी मीडिया को, वंदन लाखों चाहने वालों को सत् सत् वंदन आदरणीय सागर जख्मी साहब इंकलाब पब्लिकेशन बंबई को जो मुझे सदा ही पिता तुल्य सम्मान देते हुए यह अद्भुत उपलब्धि लिए स्नेह प्यार और आशीष दे रहे हैं




