
सुख गर ना दे सका तो दुःख भी ना देना
भूखे बचपन की बद्दुंआ भी ना तुँ लेना
अपने विधान में कर लो आज से सुधार
हे प्रभु हर मानव पर हो तेरा समान उपकार
कदम कदम पे पथ में ठोकर तुमने है बनाया
पाँव को चौटिल कर दुःख में घाव दिलवाया
क्यूं ऐसी तेरी बन गई जग पे नापाक विचार
हे प्रभु हर मानव पर हो तेरा समान उपकार
सज्जन के संग संग तुमने दुर्जन को बनाया
बात बात में साधु के संग में विवाद भी कराया
क्यूँ सिखलाया तुँ ऐसी ओछी सी संस्कार
हे प्रभु हर मानव पर हो तेरा समान उपकार
दौलतमंद के घर पे पुनः दौलत को बरसाया
दीन गरीब को दबंग के हाथों से उजड़वाया
जगवाले के संग क्यूं तेरी ऐसी हो गई व्यवहार
हे प्रभु हर मानव पर हो तेरा समान उपकार
पत्थर दिल शैतान को अवतरण कराया
नरम दिलवाले को नाहक में तड़पाया
क्यूँ करता है तुँ ऐसी जगत में घृणित व्यापार
हे प्रभु हर मानव पर हो तेरा समान उपकार
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार



