साहित्य

मकर संक्रांति पर्व

पंडित मुल्क राज "आकाश"

बड़ा ही शुभ दिन आज
मकर संक्रांति आई रे
झूम उठे नर और नार
मकर संक्रांति आई रे।

संघार किया असुरों का
सब जन की जान बचाई।।
भगवान श्री विष्णु जी ने।
इस धरा पर लीलादिखाई।।
हुए जीवन सभी गुलजार।
मकर संक्रांति आई रे।।

फसलों में फसल निराली।
पीली सरसों ने रंग बिखेरे।।
खेतों की छटा निराली।
खुशियों के हुए सवेरे ।।
आई ऋतुओं की बहार।
मकर संक्रांति आई रे ।।

दिशा सूर्य की उत्तर होगी।
दान विधान विधि पूरी होगी ।।
तिल गुड़ और शक्कर से ।
सब आराध्या की पूजा होगी।।
फिर आनंद पाए कुल संसार।
मकर संक्रांति आई रे।।

मक्का बाजरा साग बनेगा।
खिचड़ी का भंडारा लगेगा।।
श्रद्धा विश्वास से सब जन।
घर-घर में पर्व मानेगा ।।
यह सनातन का उपकार।
मकर संक्रांति आई रे।।

पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश

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