
लिख दी लहू से अमर
कहानी वतन के खातिर।
हॅंसकर कर दी कुर्बानी,
अपनी जवानी वतन के खातिर।
भारत माॅं का वह दुलारा,
नाम आजाद संकल्पों से फौलाद।
चौदह वर्ष की अल्प आयु में,
कानून भंग आन्दोलन में गिरफ्तार हुए।
मजिस्ट्रेट ने जब पूछा उनका नाम,
‘आजाद’बताया पिता का नाम ‘स्वतंत्रता’।
और निवास अपना ‘जेल’ बताया।
15कोड़े की सजा मिली थी उनको।
हर बार ‘वन्दे मातरम् ‘,
‘ महात्मा गांधी की जय’ हुंकारा था।
आजाद की आन वैरियों से वैर भरा था,
ताव मूॅंछों को देता चले,दुश्मन को ढेर करे।
शहीद भगत सिंह और राम प्रसाद बिस्मिल,
क्रांतिकारियों का अनन्यतम साथी था।
काकोरी ट्रेन डकैती,साण्डसे की हत्या में,
वह शामिल निर्भय क्रांतिकारी था।
दुश्मन के हाथ न लगूंगा यही प्रतिज्ञा,
अंत समय तक निभाई थी।
अल्फ्रेड पार्क इलाहाबाद में था वह,
दुश्मन ने उसको घेर कर गोली बरसाई थी ।
वह भी अपनी गोलियों से दुश्मन को भूंज रहा,
अन्तिम गोली से अपने पर निशाना साधा था। ‘वन्देमातरम ‘ बोल कर आजाद ने देह छोड़ दी।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर,बिहार




