
एक पेड़ ऐसा उगा,
करे वैद्य का काम।
उसके पाँचों अंग ही,
आवें सबके काम।।
उसकी शीतल छाँव में,
सोते पांव पसार।
आक्सीजन मिलती रहे
ठण्डी मिले बयार।।
फोड़े फुंसी यदि करें,
काया का नुक़सान।
पत्र उबालो नीम के,
कर लो तुम अस्नान।।
छाल,निबोली नीम की,
रोग में आवे काम।
पत्ते फूल जलाओ तो,
मच्छर मरें तमाम।।
नीम तैल बाती जरै,
कीड़े सब मिट जाँय।
शुद्धवायु करता सदा,
घर में लियो लगाय।।
दवा नीम की खाओ तो,
साफ रहेगा खून।
दांत बने मजबूत जो ,
करे नीम दातून।।
आशा बिसारिया चंदौसी




