
अंग्रेजों के निरे मानस -पुत्र
भर दिये हैं शिक्षा-संस्थान।
सारी मर्यादाएं तोड़ रहे हैं
मूर्ख,मूढ़,बुद्धिहीन,नादान।।
बहनों को भाभी बना रहे
देवर बना रहे भाईयों को।
नीच,कुटिल, दुष्ट,सोच है
तैयार कर रहे दंगाईयों को।।
होली पर्व का क्या अर्थ है
किस पर्व को कहते फाग।
पढ़ें-लिखे शिक्षक अनपढ़
हरियाणवी संस्कृति पर दाग़।।
कोलडे मार देवर -भाभी
भाई -बहन नहीं खेलते हैं।
पशु बुद्धि ओ राक्षस बुद्धि
विश्वविद्यालयों में डोलते हैं।।
कामुकता भरे हुये गंदगी
भाई-बहन बिगाड़ा रिश्ता।
हरियाणवी मूल्यों के दुश्मन
नीचता कर समझें फरिश्ता।।
हरियाणा संस्कृति अकादमी
क्यों मौन हो कुछ तो बोलो।
इस घटिया, नीच -कर्म पर
हिम्मत कर अपना मुंह खोलो।।
टटीहरी गाने के गायन पर
एक्शन में महिला आयोग।
रणबीर विश्वविद्यालय पर
एक्शन लेने का करो उद्योग।
अपने दल के दलदल वाले
नीच-कर्म भी सब जायज हैं।
दूसरे दल नैतिक नियम भी
सभी के सभी नाजायज हैं।।
गांव देहात के भोले-भाले
उनको तुम गंवार कहते हो।
उच्च-शिक्षित बछिया ताऊ
संस्कृति-विरोधी गट्टर रहते हो।।
अपने मुंह से अपनी बड़ाई
शिक्षामंत्री कहां सो रहे हैं।
हरियाणवी जीवन-मूल्यों में
जानबूझकर कांटे बो रहे हैं।।
जिसन यह भौंडा खेल किया
कब होगी उनकी गिरफ्तारी।
या कि बलात्कार, छेड़खानी
अनैतिकता करोगे तरफदारी।।
कुलगुर, प्रोफेसर, विद्यार्थी
प्रसिद्ध गायक मौजूद कौन।
किस मूर्ख ने किया आयोजन
मूल्यों के रक्षक क्यों हो मौन।।
नंग धड़ंग अंग बेढंग प्रदर्शन
मजाक बनाया उत्सव फाग।
कामुकता भौंडा अंग-प्रदर्शन
छात्र-छात्रा भड़का रहे आग।।
कामुक कीड़े गंदी नाली के
लोक -संस्कृति बने हैं रक्षक।
वास्तव में निरे भौतिकवादी
हरियाणवी मूल्यों के भक्षक।।
पूरा सिस्टम जिनके हाथ में
तथाकथित पढे-लिखे गंवार।
नैतिक मूल्य अ ब स न जानें
हरियाणवी – शिक्षा पर भार।।
बादशाह नामक गायक दोषी
सारा सिस्टम ही पीछे पड़ा है।
जींद विश्वविद्यालय के दोषी
बचाने वाला कौन धड़ा है।।
आगे आओ पढे-लिखे मूर्खों
नीच आयोजन करो विरोध।
तार-तार छात्र – छात्रा रिश्ता
जड़बुद्धि, तामसिक,अबोध।।
शिक्षा जगत् तुम कलंक हो
कीड़े हो तुम वासना उन्मुक्त।
इसका फल तो भोगना पड़ेगा
संस्कृति बिगाड़ूं डिग्री उपयुक्त।।
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डॉ. शीलक राम आचार्य
वैदिक योगशाला


