साहित्य

दुनिया के नेता आलसी हो जायें (हास्य-व्यंग्य)

जयचन्द प्रजापति 'जय'

जब दुनिया में युध्द जैसे हालात हो जाये, एक देश दूसरे देश के खून के प्यासे हो जाये तो युध्द को निष्क्रिय करने का सबसे बढ़िया जुगाड़ टेक्नोलॉजी यह है कि सारे सक्रिय नेताओं को आलसी हो जाना चाहिए। निकम्मा हो जाना चाहिए। पत्नी के साथ विलासितापूर्ण जीवन जीना शुरू कर देना चाहिए।

अपने मोबाइल को रिचार्ज कराने से बचे। हो सके तो इनकमिंग काल की भी सुविधा न ले। तब युध्द की ललकार खत्म हो जायेगी। कोई किसी पर टीका टिप्पणी कर नहीं पायेगा। हो सके तो नींद की गोली खाकर आराम की शैय्या पर विश्राम करे।

यह एक देशी नुस्खा है। एक कलमकार का दिया गया तजुर्बा है। सच कहता हूँ। इस नुस्खे से दुनिया को बचाया जा सकता है। अपने सैनिकों को भी आराम परस्त जीवन जीने का सलाह दे देना चाहिए। नफरत की आग में देशी घी मत डालो बल्कि देशी घी को रोटियों में चुपड़ कर खा जाओ। सेहत बनेगी तथा दिमाग की खुजली भी खत्म हो जायेगी।

युध्द में प्रयोग होने वाले घातक हथियारों को किसी कोने में रख दीजिये। सबको कबाड़ बना दीजिये। नेताओं का मन युध्द करने में ज्यादा न लगे। इसके लिए किसी प्राकृतिक दृश्यों को देखने चले जायें। कुछ जानवरों को पाल लीजिए। दूर की पहाडि़यों पर अपनी प्रियतमा के साथ रहिये।

युध्द में न मन लगे इसके लिए अपनी प्रियतमा के गालों को हलके हाथों से छूने का प्रयास करें ताकि वह एक सौम्य मुस्कान बिखेरती रहे और आप उसके प्रेम की लौ में अपने प्रेम को परिपक्व करते रहें। उसके घुंघराले बालों को अपने अंगुलियों से कंघी करें। उस प्रेयसी के प्रेम में आपका तन-मन पूर्णरूप से भीगा रहेगा। युध्द की लौ अपने आप बुझ जायेगी।

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जयचन्द प्रजापति ‘जय’

प्रयागराज

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