
मैं मजदूर हूं।
बच्चों के खातिर करता परिश्रम,
उसी के लिए सारा जीवन समर्पण।
सारी दुनिया से लड़ता,
मजदूरी ही करता।
मैं मजदूर हूं।
बच्चों को पाल पोसकर ,
बनाया नेक इंसान।
सारे जहां से अच्छा,
अपना भारत महान।
मैं मजदूर हूं।
मैंने कष्ट सहा,
मजदूरी की।
बच्चों की परवरिश में,
कोई कमी न की।
देश हो या मेरे बच्चे,
मैंने स्वप्न साकार करने के लिए,
मजदूरी की।
मैं मजदूर हूं।
दुर्गेश मोहन
बिहटा, पटना (बिहार)




