साहित्य

मैं मजदूर हूं

दुर्गेश मोहन

मैं मजदूर हूं।
बच्चों के खातिर करता परिश्रम,
उसी के लिए सारा जीवन समर्पण।
सारी दुनिया से लड़ता,
मजदूरी ही करता।
मैं मजदूर हूं।
बच्चों को पाल पोसकर ,
बनाया नेक इंसान।
सारे जहां से अच्छा,
अपना भारत महान।
मैं मजदूर हूं।
मैंने कष्ट सहा,
मजदूरी की।
बच्चों की परवरिश में,
कोई कमी न की।
देश हो या मेरे बच्चे,
मैंने स्वप्न साकार करने के लिए,
मजदूरी की।
मैं मजदूर हूं।
दुर्गेश मोहन
बिहटा, पटना (बिहार)

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