साहित्य

कुछ फायकू उनके 

संजय प्रधान

1- करवटें बदलते रहे हम,

सो न पाए,

तुम्हारे लिए।

 

2-जल्दी जल्दी मिला करो,

नहीं होता इंतजार,

तुम्हारे लिए।

 

3- कहते हो नहीं आएंगे,

इंतजार करेंगे हम,

तुम्हारे लिए।

 

4- आया है प्यारा मौसम

कितने सालों में,

तुम्हारे लिए।

 

5- खुश्बू हो गया मैं

राहों में फैला,

तुम्हारे लिए।

 

6- बहुत मिन्नतें की मैंने,

चांद मान गया,

तुम्हारे लिए।

 

7- चाहते कहती है हमारी,

रातें कटेंगी प्यारी

तुम्हारे लिए।

 

8- चांदनी सा चमका चांद

फूल दमक गए,

तुम्हारे लिए।

 

10- मेहंदी लगा के आना,

कंगन लाया हूं,

तुम्हारे लिए।

 

11- चाहतें गाएंगी प्रेम गीत,

और बहेगा संगीत,

तुम्हारे लिए।

 

12- आखिर तुम्हें आना पड़ा,

प्यास जरा बुझी,

तुम्हारे लिए।

 

13-अभी तो आए तुम,

बहाना नहीं चलेगा,

तुम्हारे लिए।

 

14- फूल गजरे सजाएं मैने,

सितारे मंगाए मैंने,

तुम्हारे लिए।

 

15- दिल अभी भरा नहीं,

ये कहूंगा मै,

तुम्हारे लिए।

संजय प्रधान

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