साहित्य

सन्त विवेकानंद ने , किया विश्व में नाम।।

आशा बिसारिया

योग और वेदान्त पर,चलना उनका काम।।

*आध्यात्मिक गुरु वे रहे,किया समाज सुधार।

धर्म सम्मेलन में दिया ,जग को नया विचार।।

*

जीवन में हो सादगी ,शिक्षा हो अनिवार्य।

मानव सेवा ही रहे ,शाश्वत व अपरिहार्य।।

*

अपने गुरु के नाम पर,किया समाजसुधार।

मठ की करी स्थापना ,सेवा जिसका सार।।

*

अभय बनो तुम सर्वदा,शिक्षा पर दो ध्यान।

ऐसे होंगे यदि युवक ,पीढ़ी बने महान।।

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‘ज्ञानयोग’ व ‘राजयोग’, देतीं उच्च विचार।

अल्प आयु में कर गये,परम लक्ष्य साकार।।

 

आशा बिसारिया चंदौसी,उ०प्र०

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