
योग और वेदान्त पर,चलना उनका काम।।
*आध्यात्मिक गुरु वे रहे,किया समाज सुधार।
धर्म सम्मेलन में दिया ,जग को नया विचार।।
*
जीवन में हो सादगी ,शिक्षा हो अनिवार्य।
मानव सेवा ही रहे ,शाश्वत व अपरिहार्य।।
*
अपने गुरु के नाम पर,किया समाजसुधार।
मठ की करी स्थापना ,सेवा जिसका सार।।
*
अभय बनो तुम सर्वदा,शिक्षा पर दो ध्यान।
ऐसे होंगे यदि युवक ,पीढ़ी बने महान।।
*
‘ज्ञानयोग’ व ‘राजयोग’, देतीं उच्च विचार।
अल्प आयु में कर गये,परम लक्ष्य साकार।।
आशा बिसारिया चंदौसी,उ०प्र०




