साहित्य

छोड़ता वही है,,

डॉ रामशंकर

वह ख़ुद बता गई सारी दुनिया को कि वह कितना प्यार करती हैं, मैं क्या करता ठीक हैं सत्य था क्यों कि वह नादान यह नहीं समझ सकी कि छोड़ता वही है जो प्यार कर बैठता है और कुछ विवशता ऐसे होती हैं कि बहुत बहुत चाह कर भी

कुछ अपने खास इसकी इज्ज़त नहीं देते हैं तब इसके पूर्व की यह कोई परेशानी मैं डाल दे न चाहकर भी निर्णय लेना होता है कि छोड़ देना ठीक होगा और मन आत्मा को समझते हुए दिल पर कठोर कदम उठा कर के छोड़ना पड़ता है, जब दिल और आत्मा स्वीकार कर लेती हैं पूर्ण रूप से चाहकर भी छोड़ नहीं जा सकता फिर भले न मिले न कोई बात हो पर वह प्यार जो चौकने वाला सत्य बन सदा ही साथ रहते हैं और मन आत्मा सदा ही उस के लिए दुआं चाहते हुए जीवन व्यतीत करना पड़ता हैं यह सोच कि अगले जन्म में मिलेंगे रही बात अगले जन्म की अद्भुत सत्य भी लगती हैं जो अक्सर सुनी जाती हैं और न भी हो तो मन को समझाने के लिए इसे अच्छा कोई उपाय नहीं है ताकि जिंदगी याद करते ही बताने का प्रयास सफल हो कुछ हद तक और यदि यह सचमुच प्यार होता हैं दो आत्मा एक सी होती हैं तो सम्मान से जिंदगी भर याद करते हुए सुख सुकून महसूस करते हुए जीवन व्यतीत कर देते हैं

यह हां यही वह रूह प्रेम है आत्मा से किया गया कोई चाह नहीं कोई अपेक्षा नहीं बस मन से आत्मा से सदा ही एक दूसरे के लिए सम्मान आदर करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की जाती हैं उसके सुख सुकून की और ईश्वर कृपा बनी रहती है ऐसे विरले पावन पवित्र रूह प्रेम पर यह सत्य स्वीकार करना होगा जो सदियों से चला आ रहा है यदि नीयत साफ़ है प्यार में कोई चाह नहीं है तो सदियों जिन्दा रहता है यह अपनी सार्थक उपस्थिति के साथ दुनियां में प्रेरणा बन प्यार की पावनता और पवित्रता का संदेश देता हुआ आनेवाले कल को उसके महत्व और अस्तित्व का अहसास करता हुआ

 

डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ मध्य प्रदेश

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