
देर लगेगी किंचित लेकिन, यह जग अच्छा हो जाएगा।
मन के सारे कलुष मिटाकर, मानव सच्चा हो जाएगा।।
स्वार्थ-भाव के अंध तमस में, भटक रहा जो मानव है।
प्रेम-दीप की ज्योति जलाकर, मिट जाएगा दानव है।।
सत्य-धर्म की राह पकड़कर, जीवन उज्ज्वल हो जाएगा।
मन के सारे कलुष मिटाकर, मानव सच्चा हो जाएगा।।
नफरत की दीवारें दरका कर, प्रेम-सुमन सजाएँगे।
टूटे मन के तार सभी फिर, मधुर राग बन जाएँगे।।
करुणा का जब भाव जगेगा, जग भी अच्छा हो जाएगा।
मन के सारे कलुष मिटाकर, मानव सच्चा हो जाएगा।।
लोभ-मोह के बंधन टूटेंगे, निर्मल होगा अंतर्मन।
नीति-न्याय के पथ पर चलकर, ऊँचा होगा यह जीवन।।
अंधकार का अंत सुनिश्चित, नव प्रभात पक्का हो जाएगा।
मन के सारे कलुष मिटाकर, मानव सच्चा हो जाएगा।।
शिव कहता विश्वास रखो तुम, परिवर्तन निश्चित होना है।
सद्भावों की पुण्य धरा पर, नव निर्माण अब होना है।।
मानवता का जब फूल खिलेगा, जग अच्छा हो जाएगा।
मन के सारे कलुष मिटाकर, मानव सच्चा हो जाएगा।।
कविराज डाॅ०-शिवकुमार सिंह ‘शिव’
दुसौंती, रायबरेली-२२९३०६




