साहित्य

अश्कों की व्यथा

संगीता वर्मा

अश्क़ (आँसू) में छिपी उस गहरी

व्यथा और अनकही दास्तान है,

जो लफ़्ज़ों में बयां नहीं हो पाती,

अश्कों में भीगे ये जज्बात है।

 

छलकते अश्क़ों की इस गहराई में,

छिपी है एक अनकही सी दास्तान।

लबों पर तैरती है जो झूठी मुस्कान,

इन आँखों में बसता है वो सूनापन।

 

दर्द का समंदर इन बूंदों में सिमट आया,

हर ख़ामोश कतरा बहुत कुछ कह गया।

कोई न समझ पाया इस मौन की भाषा,

अश्क़ बहते रहे और दिल जलता गया।

 

बयां जो न हो सके वो अल्फाज़ हैं ये,

टूटे हुए सपनों की आह-ओ-फ़ुग़ान हैं।

आँखों की नमी में जो धुंधला सा मंजर है,

बस यही एक अश्क़ में छिपी पहचान है।

 

स्वरचित एवं मौलिक

संगीता वर्मा

कानपुर उत्तर प्रदेश

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