
कागज़ पर उतार दूँ तो स्याही रो पड़े
बातों में कह दूँ तो लफ़्ज़ थक जाएं
तेरे बिना भी जी रही हूँ
तेरे साथ वाली आदत नहीं गई
चाहती हूँ भूल जाऊं तुझे
पर यादें इज़ाज़त नहीं देतीं
कैसे भूल जाऊं तुझे
मेरे हर एक स्वास में तू समाया
तेरी मुस्कुराहट ने मुझे मेरा होना बताया
तेरी आंखों ने मुझे झूठ देखना सिखाया
खुदको भुला के
खुदको तेरा बनाया
तुझे कागज़ पर उतार दूँ
ऐसी मैं कोई कलम नहीं
तुझे बातों में भूल जाऊं
शायद इतना भी मेरा प्यार कम नहीं।।
रिया राणावत
कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)




