

माया-मोह का बंधन नहीं टिकता,
जब जुड़ जाए भोले से रिश्ता,
मन मेरा मुझसे ही कहता,
बिन भोले कुछ अच्छा नहीं लगता।
माया-मोह का …..
ध्यान धरें जब-तब भोले का,
मन तनिक नहीं घबराता है,
कदम-कदम बढ़ जाते आगे,
भाव भोले का बढ़ जाता है।
माया-मोह का …
कौन,कहां,कब,कितना-कितना,
जीवन में साथ निभाता है,
पर भोले का साथ जो पाता,
वो पल-पल मुस्काता है।
माया-मोह का ….
सुबह-शाम,दिन-रात में भोले,
जीवन का साज बजाते हैं,
हम अदने से भगत हैं उनके,
चरणों में शीश झुकाते हैं।
माया-मोह का ….
जोड़-तोड़ की दुनिया सारी,
हम क्यूं इसमें बहते जाएं,
भोले ही जग भर में व्यापे,
आओ उनमें ध्यान लगाएं।
माया-मोह का ….
(246/303वां मनका)
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कार्तिकेय कुमार त्रिपाठी ‘राम’
सी स्पेशल,गांधीनगर, इन्दौर




