साहित्य

शहर भर ग़म

अशोक आनन मक्सी

गाॅंव भर खुशियाॅं ।
शहर भर ग़म ।

मुस्कानों का –
खीसा ख़ाली ।
नीर भरी –
नैनों की थाली ।

गाॅंव भर मरहम ।
शहर भर ज़ख़्म ।

पतझड़ों के –
सजे हैं मेले ।
मधुमास के –
नित नए खेले ।

गाॅंव भर उजास ।
शहर भर तम ।

शहर से घर –
हुए फ़रार ।
मकानों में –
आए न क़रार ।

गाॅंव भर रहम ।
शहर भर ज़ुल्म ।

दिल के रिश्ते –
हुए कमज़ोर ।
गाॅंठ ही गाॅंठ –
लगीं हर ओर ।

गाॅंव भर निश्चल –
शहर भर छद्म ।

+ मक्सी जिला शाजापुर (म.प्र.)

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