
मेरी है शुभकामना,और यही मंतव्य।
नया वर्ष हो आपका,अति उन्नत अति भव्य।
दुखद घड़ी आए नहीं,सुख का हो संचार,
पूर्ण करें हर लक्ष्य को,बोध रहे कर्तव्य।।
आशा का पंछी उड़ा,ले सपनों का पंख।
नए वर्ष की भोर ने,जब फूंँका है शंख।
लक्ष्य साथ कर पग बढ़ें,मंजिल हो आसान,
संयम साहस शौर्य से,बनें राष्ट्रीय मंख।।
आजादी हमको मिली,देख हुए सब दंग।
चढ़ा आज भी है वही,अंग्रेजों का रंग।
चलो सभी मिल ठान लें,तोड़ पुरातन नीति,
चैत्र मास की प्रतिपदा,नए वर्ष हो ढंग।।
कोरा कागज वर्ष है,जीवन एक किताब।
पृष्ठों का होता रहे,प्रतिदिन यहाँ हिसाब।
धर्म-कर्म से यदि भरें,फल मिलता अतिरेक,
पुष्पित होती जिंदगी,मिलती सुरभि गुलाब।।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश




