साहित्य
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हो रहा सरेआम कत्ल
हो रहा सरेआम कत्ल,……. उन बेजुबान पेड़ों का……. लुटा रहा है अस्तित्व ……, धरती मां के प्यारो का……. सूख रही…
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मेरी स्कूल की दुनिया
चार दीवारों के बीच बसी, एक छोटी-सी दुनिया थी, जहाँ हर दिन नई कहानी, हर पल में खुशियाँ जुड़ी थीं।…
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बाल कविता जल बचाओ
बूँद- बूंँद वसुधा गिरती धरती को सिंचित करती हरा- भरा खुशहाल करे अन्न-फसल पैदा करती।। बूंँद -बूंँद है जल की…
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गणगौर
शिव गण है गण के शिव गौरा पार्वती । पहले शिव की अर्धांगिनी थी नाम सती ।। है गणगौर त्यौहार…
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आज के नौनिहाल,कल के कर्णधार
1 गुम हुआ बचपन और गायब रुन – झुन है। आंगन का खेला और गायब चुन- मुन है।। बच्चे बन…
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ज़िंदगी का प्रश्न-पत्र
ज़िंदगी भी किसी परीक्षा से कम नहीं, हर सुबह एक नया प्रश्न सामने रख देती है। कहीं विकल्प होते हैं…
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मंद मंद मुस्कान लिए
मंद-मंद मुस्कान लिए सुबह सुबह जब आते हो। अंधियारी हर कर के उजाला फैलाते हो।। कोना कोना रोशनी से भर…
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विश्व वानिकी दिवस
हरे-भरे जंगल, समृद्ध जीवन का आधार हैं। पेड़ लगाएँ, पर्यावरण बचाएँ। हमारा संकल्प: प्रकृति की सुरक्षा। विश्व वानिकी दिवस की…
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सज गया मां का दरबार
गूंज रहा चारों तरफ़ तेरा ही जयकारा मां पृथ्वी और गगन से परम पूजिता, महा पुनीता जय दुर्गा जगदम्बे मां…
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अपना अर्थ तलाश रही हूँ
अपना अर्थ जीवन का तलाश रही हूं । जीवन को खोजती उम्र को ढोती जा रही हूं। व्यर्थ सोचती खुद…
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