साहित्य
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लक्ष्य विहीन नर
बिन दिशा के भटकता, लक्ष्य-विहीन नर, हर कदम पर उलझता, लक्ष्य-विहीन नर। राह दिखती नहीं, धुंध में खो गया, खुद…
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कविता दिवस पर—मैं कौन सी कविता लिखूँ?
कविता दिवस आया, मन फिर सोच में डूबा, क्या लिखूँ आज—दर्द या कोई मीठा सा लम्हा? क्या लिखूँ उस दिल…
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कवियन क दिलजानी कविता
हिरण्यगर्भ क ज्योति कलश छलकावे जइसे सविता, हियअँचल से उभरल,आ प्रकटल प्रज्ञा लौ ह् कविता। कवियन के लय धुन पे…
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तन मन को आंदोलित करता
मैं राम नाम को नित जपता। तन मन को आंदोलित करता। प्रभु की महिमा होती न्यारी। जन- जन को लगती…
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अकेलापन
दिल में कई तूफान लिए, काँधों पर अरमानों की गठरी लिए, मुठ्ठी में अरमानों के पोटली थामे , चले जा…
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खाली हाथ आया है खाली हाथ जायेगा
ये रंगमहल ये सड़क गलियां ये चौबारे सब धरा के हैं संपदा धरा नहीं तुम्हारे खाली हाथ आया है खाली…
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धरती का बढ़ता तापमान
तवे सी जलती है धरती बढ़ रहा तापमान है। इंसान ने मतलबपरस्ती में काटे वृक्ष अनेक हैं।। भूमंडलीकरण के कारण…
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हिन्दी है तो मैं जिंदा हूं
यह हिंदी तो है मेरी शान मेरे प्राण जो सारी पीड़ा और दुःख समेट सर्जन कराए मुझे सुख सुकून दे…
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कविता
मैं कविता भावों की जननी,शब्द मेरा संसार । दे आकार लेखनी मुझको, रस छंद करें श्रृंगार । पाठक श्रोताओं…
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