
मैं कविता भावों की जननी,शब्द मेरा संसार ।
दे आकार लेखनी मुझको, रस छंद करें श्रृंगार ।
पाठक श्रोताओं की, प्रतिक्रिया में बसते प्राण,
कवियों की वाणी में दिखती, है मेरी झंकार ।
विनीता चौरासिया शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश

मैं कविता भावों की जननी,शब्द मेरा संसार ।
दे आकार लेखनी मुझको, रस छंद करें श्रृंगार ।
पाठक श्रोताओं की, प्रतिक्रिया में बसते प्राण,
कवियों की वाणी में दिखती, है मेरी झंकार ।
विनीता चौरासिया शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश