साहित्य
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देखो जमाने वालो में साहब बन गया
देखो ज़माने वालो, मैं साहब बन गया, धोती बेचकर आज मैं नवाब बन गया। कल तक जो साइकिल से धूल…
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दिल
कवि-शायर मजनूं करें, दिल देने की बात । अतिशयोक्ति में बोलना, यह इनकी औकात ।।१।। ✍️ दिल को जीता जा…
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रोटी की कीमत
क्या होती है रोटी की कीमत ? भूखे को मिले तो बेसकीमती रोटी। पेट भरे को मिले तो कचरे में फेकी…
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खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे – लोकोक्ति
खम्भा नोच रही है देखो यह खिसियानी बिल्ली, अम्मा जी मुझको बतलादो जायेगी क्या दिल्ली? अम्मा बोली, काम कोई जब…
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विचारों की ख़ूबसूरती
जिस प्रकार छोटी छोटी आंखे सारा आसमान देखने की ताक़त रखतीं हैं, वैसे ही जीवन में विषमताएँ होने पर भी,…
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यादों की पोटली
ज़िंदगी के पल यूँ ही गुजर जाते हैं, समय की धारा में अक्सर बिखर जाते हैं। जो ठहर कर उन्हें…
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दुनिया के नेता आलसी हो जायें (हास्य-व्यंग्य)
जब दुनिया में युध्द जैसे हालात हो जाये, एक देश दूसरे देश के खून के प्यासे हो जाये तो युध्द…
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गजल
राम की भक्ति में मन लगाने लगी। मैं भजन राम के गुनगुनाने लगी।। राम हनुमान संग जपती ही रही। मन…
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प्रेम की दरबार
तेरी आँचल जब जब हवा में लहराई आसमान में बदरा तब तब है छाई फिजां का बदल गया रंग…
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शहर से दूर गाँव की ओर
शहर की झुलसन से छिपकर, उलझनों के जाल से निकलकर, भागमभाग की इस दौर में, चलो शहर से दूर चलें,…
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