साहित्य
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विश्व महिला दिवस पर दस्तक देती विशेष कविता
ऊँची, ऊंची, हाथी देह सी, पहाड़ियाँ रात का धनधौर अँधेरा और वह मासूम भूख से बिलखता मां की गोद में…
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बचपन का मौसम
फिर न लौटेगा कभी मौसम सुहाना यह। फिर न झूमेगा सरल बचपन दिवाना यह।। याद आयेंगे मधुर दिन वो सुहाने…
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नगर के डगर में
नगर के डगर में , जहाॅं जहाॅं ठाॅंव बा । एने ओने घूम देखीं , उहें बसत गाॅंव बा ।।…
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प्रेम की रोली
रंग सभी जन खेल रहे मिल के वृषभानु लगा मन कृष्णा। प्रीत रही मन में मन मीत बना तब छोड़…
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रंग भरी एकादशी
फागुन की मधुमास हवा में, छाई नव उजियारी, रंग भरी एकादशी आई, लेकर छवि प्यारी। गुलाल उड़े गलियों-आँगन, महके हर…
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बिन बुलाए मेहमान… हास्य-व्यंग्य
मखंचूलाल खाने के बहुत शौकीन थे। शहर में होने वाले शादी समारोह में बिन बुलाये पहुँच जाते और खूब कचर-कचर…
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“अमर घोष – मैं आज़ाद हूँ”
गरजा रण-भू पर घनघोर प्रलय-सा, सिंहनाद प्रखर जब छाया, काँपा था क्रूर फिरंगी-सिंहासन, ध्वज-दम्भ धरा पर आया। वज्र-व्रत बांध…
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पलाश और होली
फागुन की पहली आहट पर जब धरा मुस्काती है, पलाश की अग्नि-सी लाली वन-वन जगमगाती है। टेसू के फूलों से…
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जो प्रवेश अंतर्मन करते
जो प्रवेश अंतर्मन करते । वो विचार मानवता गढ़ते ।। अच्छा सोचो अच्छा बोलो । वाणी अपनी पहले तोलो ।।…
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असामाजिक तत्व से जग परेशान
असामाजिक तत्व से आज जग है परेशान असामाजिक तत्व के विरूद्ध छेड़ो अभियान असामाजिक तत्व का हो अब गहन पहचान…
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