साहित्य

अटल की अटल नीति

डा राजेश तिवारी मक्खन

आओ ओ जन प्रिय नेता को श्रद्धांजलि देते हैं ।
आज अटल योद्धा से शुभ नीति सबक लेते हैं ।।

ब्रह्मचर्य हैं श्रेष्ठ बताया विश्व चकित होता हैं ।
आत्मबल यदि है पाये जग में जो खोता हैं ।।
संसद में ही नहीं विश्व में गूंजी जिसकी वाणी ।
कवि वक्ता आपको आशीष था वीणा पाणी ।।
जननायक की जग में प्रतिपक्ष प्रशंसा करते हैं ।
आज अटल योद्धा से शुभ नीति सबक लेते हैं ।।
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दसवें देश के प्रधानमंत्री यह तीन बार हुए है ।
बुन्देलखण्ड के वीर आप बुलन्द स्टार छुए हैं ।।
मेरी इक्यावन कविताएं पुस्तक एक लिखी है ।
काव्य और वक्तव्य की प्रतिभा नेक दिखी है ।।
देशभक्त गौरवगाथा कविगण भी कह देते हैं ।।
आज अटल योद्धा से शुभ नीति सबक लेते हैं ।।
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परमाणु परीक्षण करवाया हर्ष लहर गई छाई ।
नेता जो डरते थे उन्होंने भी बटवायी मिठाई ।।
भारत रत्न आप थे निश्चित ये पदवी भी पाई ।
गायक चतुर ग्वालियर वाले कैसी कीर्ति गाई।।
धोती कुर्ता और जाकेट में प्रसन्न दिखाई देते हैं ।
आज अटल योद्धा से शुभ नीति सबक लेते हैं ।।
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कदम मिलाकर चलना होगा यह सिखलाया है।
क्या हार में क्या जीत में समत्वयोग कहलाया है ।।
गीत नया गाता हूं हार नहीं मानूंगा गुनगुनाया है।
इसी लिए तो नेता अटल मां भारती को भाया है ।।
सेवक बन मां भारती की कुछ सेवा कर लेते हैं ।
आज अटल योद्धा से शुभ नीति सबक लेते हैं ।।
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डा राजेश तिवारी मक्खन
झांसी उ प्र

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