साहित्य

हे माँ दुर्गा पापनाशनी,तेरा वंदन बारम्बार है

एस के कपूर "श्री हंस"

श।।1।।
सुबह शाम की आरती और
माता का जयकारा।
सप्ताह का हर दिन बन गया
शक्ति का भंडारा।।
केसर चुनरी चूड़ी रोली हे माँ
तेरा श्रृंगार करें सब।
सिंह पर सवार माँ दुर्गा आई
बन भक्तों का सहारा।।
।।2।।
तेरे नौ रूपों में समाई शक्ति
बहुत असीम है।
तेरी भक्ति से मिलते विचार ओ
ऊर्जा बहुत नवीन है।।
हे वरदायिनी पापनाशनी चंडी
रूपा कल्याणी तू।
लेकर तेरे नाम मात्र से हो जाता
व्यक्ति दुखविहीन है।।
।।3।।
नौं दिन की नवरात्रि मानो कि
ऊर्जा का संचार है।
भक्ति में लीन तेरे भजनों की
लगती भरमार है।।
कलश कसोरा जौ और पानी
आस्था के प्रतीक।
हे जगत पालिनी माँ दुर्गा तेरा
वंदन बारम्बार है।।

।।चैत्र नवरात्रि की अनन्त असीम शुभकामनायों सहित।।
रचयिता।।एस के कपूर “श्री हंस”
बरेली।।
©. @. skkapoor
सर्वाधिकार सुरक्षित

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