
बोला एक दिन, छोटा बच्चा!
माँ! दुनिया में कौन है सच्चा ?
बोली, माँ सुन मेरे पुत्तर!
अभी न समझेगा तू उत्तर!
बेटा अभी हो तुम नादान!
कैसे? करेगा सच का ज्ञान!
माँ, बातों में बहलाती!
सही उत्तर सोच न पाती,
मुन्ना भी था बड़ा सयाना!
आसान नहीं उसे बहलाना।
बोली माँ, कौन है सच्चा?
तू ही बतला दे मेरा बच्चा !
मुन्ना बोला पकड़ती टीचर मेरा झूठ,
मुझे बचाने क्यों तुम पड़ती टूट ?
जब मैं बच जाता टीचर से,
तब होती तुम नाराज़ मुझसे!
फिर तुम मुझसे जाती रूठ….
और कहती, तेरे कारण बनी मैं झूठ,
माँ तुम सबसे सच्ची हो।
क्यों ? तुम इतनी अच्छी हो।
सुन मुन्ना ! अब मेरा उत्तर!
अच्छा होता हर माँ का पुत्तर।
कविता ए झा
नवी मुंबई



