
वह लड़की
याद आती है, भाग 4
वह लड़की
याद आती है
गांव की पगडंडी से
सफर शुरू करती
झोपड़ी में रहते हुए
लालटेन की रौशनी में
अपने किरदार का निर्माण करतीं
खेतों में दौड़ती
परखो का पानी पीती
पेड़ से पक्षी से बातें करती
सदा ही प्रसन्न हो
जीती हुई
एजे संपूर्ण भारत में चर्चित हो
उच्च पद पर विराजमान हो
पूरे देश की नारी शक्ति को
उर्जा प्रदान करती हुई
दिखाई देती हैं
वह लड़की
याद आती है
जिसने अपने सत् कर्म पथ पर दस्तक दे आज जीवन सार्थक कर दिया और गांव की शान के साथ
देश में भारत में चर्चित हो चर्चा बन गई है जिसकी अद्भुत आत्मा विश्वास से पढ़ लिख कर
गौरव मय इतिहास रच दिया
वह लड़की
सचमुच बेहद वंदनीय है
वह लड़की
आज लाखो की प्रेरणा स्रोत है
नारी शक्ति को अनुपम
उदाहरण है जो
आज भी लगी हुई है
अपने आई एस अधिकारी पति के साथ
गरीबों के लिए हितकारी जीवन में
नारी शक्ति को साथ दे
बच्चों को बूढ़ों को
प्यार और सुकून दे
वोह लड़की
लड़की नहीं साक्षात ईश्वर
रूप है जो
प्रकृति की छांव तले
अपना जीवन शुरू करते हुए
आज महानगर की
शान बन गई
उसने साबित कर दिया
प्रतिभा कोई भी हो
मोहताज नहीं है
किसी धर्म राजनीति जाति
अमीर और गरीबी की
शहर और सम्पन्नता की
प्रतिभा है और
समर्पण है
निष्ठा लगन और आत्मा विश्वास है
चरित्र और मानवीय सोच है
तो सदा ही
ईश्वर उसके साथ पास है
उसने साबित कर दिया
अपनी साधना और तपस्या से
वह लड़की
याद आती है मुझे ही क्यों
आज सभी देश वासियों को
याद आती हैं
और उसकी महिमा की
चर्चा करते हुए
अपने बच्चों को
प्रेरित करते हैं
वोह लड़की
सचमुच
वह लड़की
अद्भुत है
कमाल है ईश्वर रूप है
जो सैकड़ों अच्छे काम करते हुए
अपने किरदार को सतत् वंदन करते
लगी हुई है आज भी
वह लड़की
वंदनीय है
पूज्य है
देश की धरती की
ऊर्जा है ताकत है
सृष्टि विकास की
संबल है
प्रणाम करता हूं
उसे उसके किरदार को
सत् सत् प्रणाम
उस जैसी
तमाम लड़कियों को
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश



