साहित्य
तन हल्का मन हल्का बस कर्मों को साथ जाना है

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तन हल्का मन हल्का बस कर्मों को साथ जाना है।
दुआ लो दुआ दो बस यही ही सबको याद आना है।।
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केवल सकारात्मक सोच हो अपने और सबके लिए ही।
नफरती बात नहीं होअपने भीतरऔर किसीके लिए भी।।
यदि आपने जिंदगी के साथ और बाद भी सम्मान पाना है।
तन हल्का मन हल्का बस कर्मों को साथ जाना है।।
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नदी अविरल प्यास बुझाते सागर में विलीन होती है।
फूल खिलते दूसरोंलिए नहीं उनकी भावनाहीन होती है।।
अपने कर्म अपनी दृष्टि में भी हमें अच्छा बन पाना है।
तन हल्का मन हल्का बस कर्मों को साथ जाना है।।
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सदाअपने लिए दूजों के लिएअच्छा सोचोअच्छा करो।
अवगुण त्याग कर केवल गुणों को भीतर तुम भरो।।
दया दुआ त्याग सद्भावना को ही प्रभु ने धन माना है।
तन हल्का मन हल्का बस कर्मों को साथ जाना है।।
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रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।
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