
अनेकों दीप की लड़ियाँ,
हुई रोशन दिवाली में,
सजे घर द्वार हैं सारे,
सभी खुश मन दिवाली में।
जलाएं दीप यूँ जगमग,
कहीं भी तम न रह जाये,
उजाले से चमकता हो,
हरिक आँगन दिवाली में।
करें श्री को सभी सिमरन,
सहित गौरा व शंकर के,
गजानन शारदा के सँग,
रमा पूजन दिवाली में।
फ़सल काटी किसानों ने,
भरे भण्डार हैं घर में,
सदन धन-धान्य से पूरित,
मुदित हर जन दिवाली में।
पटाखे छूटते बाहर,
खुशी है फूटती मन में,
कहीं पर फूलझड़ियों का,
दिखे दाहन दिवाली में।
✍️ नरेश चन्द्र उनियाल,
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड।
सर्वथा मौलिक एवं अप्रकाशित सृजन।




