
खेल खिलौने रख लो मम्मी
नानी के घर जाना है
बहुत हो गया यू.के. लंदन
चलो वहाँ पर नाना हैं।
मम्मी मुझको प्रिय है भारत
प्राणों से भी प्यारा है
ताजमहल देखेंगे चल कर
दुनिया में जो न्यारा है।
हरी भरी धरती भारत की
हमें देख मुस्काती है
काली कोयल कलरव करती
मीठे गीत सुनाती है।
नानी की गोदी में बैठूँ
याद आ रही नानी है
कुल्हड़ वाला लस्सी पीऊँ
मैंनें मन में ठानी है।
नाना के संग खेलूँगा मैं
कुल्फी उनसे खाना है
जो तुमसे सीखा है मम्मी
गीत वहाँ चल गाना है।
डॉ.पुष्पा सिंह




