
जब तुम ना थे
मेरे ख्वाबों में भी तुम,
मेरी दुआओं में भी तुम थे।
मेरे मन्नत के धागों में तुम ,
मेरे दिल की उम्मीदों में भी तुम थे।

मैं अधूरी थी तुम बिन
घर का आंगन सूना था ,तुम बिन।
मानो घर का हर कोना तुम्हें पुकारता था,
मानो तुम्हारे साथ खेलने को खेल खिलौने मांगता था।
जब से जिंदगी में तुम दोनोआए हो,
मानो इस बेरंग सी जिंदगी में भरने को रंग लाये हो।
खाली सा लगता था हर त्यौहार,
पर तुम अपने साथ हर रोज नया त्यौहार लाए हो।
खेल खिलौने, चहल-पहल सब तुमसे है,
हमारे तो जीवन की उम्मीदें ही तुमसे है।
मैं लफ्जों में बता नहीं सकती,क्या हो तुम हमारे लिए,
बस सब कुछ,हां सब कुछ हो तुम हमारे लिए।
अब तो बस ये दुआ मांगू ,ये आंगन यूं ही मुस्कुराता रहे,
हर दिन मेरे राघव माधव की जिंदगी में खुशियां लाता रहे।
एकता शर्मा


