
जब तक शोषक और शोषित है,
मैं इनका द्वंद्व लिखूंगा ही।
चाहे दुनिया मुझे जो कहले,
मैं कर्तव्य-मार्ग पर चलूंगा ही।
मजदूर पक्ष में रहने का,
मेरे ऊपर इल्ज़ाम तो होगा ही।
पर कहने वाला जो भी कहे,
मैं शोषित का पक्ष रखूंगा ही।
जो चल रही हैं साजिशें,
मैं उसका पर्दाफाश करूंगा ही।
धनपतियों की है शासन यह,
मैं बेहिचक ये बात कहूंगा ही।
जब भी अश्रु बहते मैं देखूंगा,
मैं कलम तोड़कर लिखूंगा ही।
शोषित जनसाधारण में मैं,
मुक्ति की भाव तो भरूंगा ही।
जबतक कोई देश में भूखा है,
मैं इंकलाब लाने को लिखूंगा ही।
मैं जीवन की अंतिम सांसों तक,
अपने कर्तव्य-मार्ग पर चलूंगा ही।
अमरेन्द्र
पटना, बिहार।




