
सूरज दादा आ भी जाओ।
जल्दी ठंडी दूर भगाओ।
मुखड़ा अपना हमें दिखाओ,
ठंडी हवा से प्राण बचाओ।।
सर्दी खांँसी खूब सताए।
आंँखो में पानी भर जाए।
सुनो आदित्य विनती मेरी,
पंजा काँपे, होंठ थरथराए।
नभ पर देरी से हो आते।
बच्चों को कितना तड़पाते ।
ठंडी में कैसे हम खेले ,
बात क्यों नहीं समझ पाते।।
धीरे-धीरे क्या है आना।
आते ही शीघ्र चले जाना।
क्यों रूठे हो हम बच्चों से,
भूल हुई क्या मुझे बताना।।




