
जीवन सांप सीढ़ी का खेल
लोगों का आपस मे नहीं है मेल!!
पैसों से सब बिकता है अब
पैसा करता सबका मेल!!
नफ़रत की आदी है दुनिया
प्यार के रिश्ते हैं बेमेल!!
जीवन सांँप सीढ़ी का खेल
कमजोरों पर रोब गांठते
अफसर चोर सिपाही खेल!!
सत्ता का नशा सर चढ़कर बोले
बेगुनाह को होती जेल!!
जीवन साँप सीढ़ी का खेल
डॉक्टर सब भगवान हो गए
निर्भर है दवाइयो पर अनेक!!
इंसान में देखो होड़ मची है
महत्वाकांक्षा का सारा खेल!!
बढ़ता भ्रष्टाचार हो गया
कहांँ रह गए लोग अब नेक!!
सीना ताने चोर डकैत
जीवन सांँप सीढ़ी का खेल….
– राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




