सूरज जब छिपने को जाए
तब तो सर्दी खाने को आए
देखो इसमें ताकत कितनी
बिस्तर में भी रोब जमाए
हो जाती है बड़ी भयंकर
जब चलती है तेज हवाएं
बस सूरज से ही डरती है
वरना करलो लाख उपाय
कोहरे का जब साथ मिले
सूरज को भीआंख दिखाएं
पंडित पुष्पराज धीमान भुलक्कड़
गांव नसीरपुर कला हरिद्वार उत्तराखंड




