यूपी

सरसों की फसल पर पाले और रोगों का खतरा: कृषि वैज्ञानिक ने किसानों के लिए जारी की विशेष सलाह

सरसों की फसल पर पाले और रोगों का खतरा: कृषि वैज्ञानिक ने किसानों के लिए जारी की विशेष सलाह

हाथरस।जिले में बढ़ते पाले और घने कोहरे के कारण सरसों की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अत्यधिक नमी और गिरते तापमान की वजह से सरसों में सफेद रतुआ, तना गलन, अल्टरनेरिया ब्लाइट और फूलिया/ मृदुरोमिल आसिता/ डाउनी मिल्ड्यू जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। कृषि विज्ञान केंद्र, हाथरस के वैज्ञानिक डॉ. बलवीर सिंह ने किसानों को इस संबंध में सतर्क रहने और समय रहते बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
पाले से बचाव के लिए अपनाएं ये तरीके
डॉ. बलवीर सिंह के अनुसार, घना कोहरा और पाला सरसों की फसल को भारी नुकसान पहुँचा सकता है। इससे बचाव के लिए किसान भाई निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:
• हल्की सिंचाई: खेत में नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करें। नमी होने से मिट्टी का तापमान स्थिर रहता है और पाले का असर कम होता है।
• यूरिया का छिड़काव: पाले के प्रभाव को कम करने के लिए 1 प्रतिशत यूरिया के घोल का छिड़काव करें।
• सल्फर (गंधक) का प्रयोग: सल्फर के छिड़काव से पौधों में आंतरिक गर्मी बढ़ती है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है। अत्यधिक ठंड की स्थिति में 1000 लीटर पानी में 1 लीटर गंधक का तेजाब और आधा लीटर ‘डाई मिथाइल सल्फो ऑक्साइड’ मिलाकर छिड़काव करना अत्यंत प्रभावी रहता है।
• 500 ग्राम थायो यूरिया को 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
• पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी न होने दें। ये तत्व पौधों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं
प्रमुख रोगों का उपचार
1. अल्टरनेरिया ब्लाइट और सफेद रतुआ: इन बीमारियों के लक्षण नजर आते ही 600 ग्राम मैंकोजेब डाइथेन या इंडोफिल एम-45 को 250 से 300 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। बेहतर परिणाम के लिए 15 दिन के अंतराल पर 3 से 4 बार छिड़काव करें।
2. तना गलन रोग: जिन क्षेत्रों में यह रोग बार-बार होता है, वहां बिजाई के 45-50 दिन और 65-70 दिन बाद कार्बेन्डाजिम का 0.1 प्रतिशत की दर से दो बार छिड़काव करें।
मधुमक्खियों की सुरक्षा और दवाओं के बेहतर असर के लिए सरसों की फसल में रसायनों का छिड़काव हमेशा शाम के समय ही करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!