साहित्य

स्वच्छ समाज स्वस्थ समाज

अरुण दिव्यांश

स्वच्छता की जरूरत आज ,
स्वास्थ्य का है महूरत आज ।
जन जन का जिसपर नाज ,
स्वच्छ समाज स्वस्थ समाज ।।
जहाॅं जन जन हो सम आज ,
स्वच्छता है स्वास्थ्य का राज ।
स्वच्छता में देव देवी हैं वास ,
जीवन बनता जिनका दास ।।
स्वच्छता बिन स्वास्थ्य उदास ,
जैसे स्वास्थ्य चढ़ता मलमास ।
स्वच्छता बिन बढता आलस ,
आलस कारण पड़ें उपास ।।
होते कमजोर होता एहसास ,
बीमारी उपजे बहुत ही खास ।
बढता है सामाजिक प्रदूषण ,
अधूरी है जन जन की आस ।।
दान मान सम्मान सम्मानित ,
जब समाज हो स्वच्छ स्वस्थ ।
रहें विघ्न बाधा व्यवधान दूर ,
सामाजिक कार्य होता मस्त ।।
प्रदूषण तो होते सभी घातक ,
मस्तिष्क प्रदूषण महाघातक ।
प्रदूषण विघ्न बाधा व्यवधान ,
जीवन हेतु होता महापातक ।।

अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार

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