
आंगन में लगा !
एक तुलसी का विरबा ,
लहरा रहा –
पवन के झोंकों से
शरमा रहा सूरज की नव किरन से ।
तुम लग गये
उस फर्श को पक्का करने –
और भूल गये
अपने आंगन में लगी ,
उस
नन्हीं सी तुलसी को –
केवल ,
एक लोटा जल से सींचना ?
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कवि लेखक – डॉ रोहित सिंह गौर। जनपद (हरदोई)उत्तर प्रदेश
पुरस्कृत – आकाशवाणी व सूचना प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार




